Panic Attack को मत करें Ignore! ये Anxiety के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं, जानिए कैसे बचाव करें

आज के तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में तनाव, गुस्सा, और अपनी भावनाओं को व्यक्त न कर पाने की स्थिति अक्सर चिंता या Anxiety की ओर ले जाती है। हाल के वर्षों में Anxiety और पैनिक अटैक के मामले काफी बढ़े हैं। एंग्जाइटी एक परेशान करने वाली स्थिति है, जिसे कई लोग दिल का दौरा या अन्य गंभीर बीमारी समझ लेते हैं। कुछ लोग समझ नहीं पाते कि उनके साथ क्या हो रहा है। हालांकि, एंग्जाइटी अटैक सामान्यतः गंभीर नहीं होता, फिर भी इसके कारणों को समझना जरूरी है। अधिकतर लोग तनाव, अपनी बात न कह पाने, भावनाओं को छिपाने, अधिक सोचने, काम का बोझ या जिम्मेदारियों की बढ़ती मात्रा के कारण चिंता का सामना करते हैं। इसलिए, एंग्जाइटी से बचने के लिए सबसे पहले इसके मूल कारणों की पहचान करना आवश्यक है और फिर उस स्थिति को नजरअंदाज करना चाहिए।
Anxiety के लक्षण
डॉ. भूमिेश त्यागी, विभागाध्यक्ष, इंटर्नल मेडिसिन, शारदा अस्पताल के अनुसार, एंग्जाइटी के लक्षण आसानी से नजरअंदाज किए जा सकते हैं, लेकिन पहचानना जरूरी है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- बेचैनी और घबराहट का अनुभव
- साँस लेने में कठिनाई
- तनाव, अनिद्रा और चक्कर आना
- उल्टी, मतली और पेट की परेशानी
- थकान, कमजोरी और पसीना आना
- हाथ-पाँव सुन्न या ठंडे हो जाना
- कभी-कभी दिल की धड़कन अचानक तेज़ हो जाना
- उदासी और किसी काम पर ध्यान न दे पाना
यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक इन लक्षणों का अनुभव करता है, तो भविष्य में यह गंभीर मानसिक समस्या या डिप्रेशन में बदल सकता है।

एंग्जाइटी के मुख्य कारण
एंग्जाइटी के कारण व्यक्ति विशेष के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। फिर भी कुछ सामान्य कारण हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है।
- दबाव और घुटन – अपनी भावनाओं को व्यक्त न कर पाने से अंदर घुटन महसूस होती है। यह तनाव को बढ़ाता है और चिंता का कारण बनता है।
- तनावपूर्ण परिस्थितियाँ – परिवार में तनाव, रिश्तों की समस्याएँ, कार्य का बोझ या अन्य दबाव एंग्जाइटी को जन्म दे सकते हैं।
- बीमारी का डर – अपनी या बच्चों की सेहत को लेकर चिंता, उपचार के बारे में डर भी एंग्जाइटी का कारण बन सकता है।
- अतीत का आघात – कभी-कभी कोई ट्रॉमा या दुखद घटना भी एंग्जाइटी की शुरुआत कर देती है और समय के साथ यह गंभीर मानसिक समस्या में बदल सकती है।
इन कारणों को पहचान कर व्यक्ति अपनी स्थिति को नियंत्रित करने की दिशा में पहला कदम उठा सकता है।
एंग्जाइटी से बचाव और उपचार
एंग्जाइटी को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी भावनाओं को किसी के साथ साझा करना। अपने मन की बातें खुलकर कहें और चीज़ों को अंदर दबाएँ नहीं। इसके अलावा, यदि स्थिति गंभीर हो जाए, तो साइकोथेरपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) जैसी चिकित्सीय सहायता ली जा सकती है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्थिति का विश्लेषण कर उचित उपाय सुझाते हैं, जिससे व्यक्ति अपने तनाव और चिंता को नियंत्रित कर सके। नियमित ध्यान, योग और सकारात्मक सोच भी एंग्जाइटी कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।



