World Alzheimer’s Day: अल्जाइमर केवल वृद्धों की बीमारी नहीं, युवाओं में बढ़ रहा खतरा, जानिए बचाव के उपाय और लक्षण

World Alzheimer’s Day: अल्ज़ाइमर रोग को अक्सर बुज़ुर्गों की समस्या समझा जाता है। लेकिन यह धारणा गलत है। विशेषज्ञों के अनुसार, गलत जीवनशैली, अस्वस्थ भोजन और बढ़ते तनाव के कारण आजकल युवा भी इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। विश्व अल्ज़ाइमर दिवस के अवसर पर यह समझना जरूरी है कि यह रोग सिर्फ उम्रदराज़ लोगों तक सीमित नहीं है।
मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव
अल्ज़ाइमर रोग मुख्य रूप से मस्तिष्क को प्रभावित करता है। यह रोग मस्तिष्क की कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाता है। जब न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो ये आपस में सही तरीके से संचार नहीं कर पाते। इसका असर सोचने-समझने और याददाश्त पर पड़ता है। मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से रोजमर्रा की गतिविधियां कठिन हो जाती हैं।

याददाश्त में कमी यानी अम्नेशिया
अल्ज़ाइमर को आम भाषा में अम्नेशिया भी कहा जाता है। इस रोग के आने पर रोगी की याददाश्त और सोचने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रोगी अक्सर लोगों के नाम या हाल ही में घटित घटनाओं को भूलने लगते हैं। मस्तिष्क की ऊतक संरचना सिकुड़ने लगती है। इससे रोगी का जीवन और सामाजिक संबंध भी प्रभावित होते हैं।
व्यवहार में बदलाव
अल्ज़ाइमर रोग के बढ़ने के साथ रोगी के व्यवहार में भी बदलाव दिखाई देते हैं। रोगी अक्सर आवेगी और असामान्य व्यवहार दिखाने लगते हैं। मूड स्विंग्स और मानसिक अस्थिरता भी आम लक्षण हैं। परिवार और आसपास के लोग यह बदलाव महसूस करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है।
रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली
अल्ज़ाइमर रोग से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना अत्यंत जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक गतिविधियों में सक्रिय रहना महत्वपूर्ण है। तनाव कम करना और नींद का सही समय सुनिश्चित करना भी रोग को रोकने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं को भी इस रोग के प्रति जागरूक होना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना चाहिए।



