क्या राजनीति की भेंट चढ़ गईं दिल्ली और हरियाणा की झांकियां? जानिए 26 जनवरी की परेड से कौन हुआ बाहर

गणतंत्र दिवस की परेड महज एक सैन्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह भारत की विविधता और सांस्कृतिक गौरव का सबसे बड़ा मंच है। हर साल देशवासी बड़ी उत्सुकता से इंतज़ार करते हैं कि इस बार कर्तव्य पथ पर उनके राज्य की झांकी क्या संदेश लेकर आएगी। लेकिन, आगामी 77वें गणतंत्र दिवस (2026) की परेड से पहले एक ऐसी खबर आई है जिसने दिल्ली और हरियाणा के लोगों को निराश कर दिया है।
इस बार की परेड में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की कोई झांकी नज़र नहीं आएगी। हैरानी की बात यह है कि पिछली बार पांच साल के लंबे इंतज़ार के बाद दिल्ली का ‘शिक्षा मॉडल’ परेड का हिस्सा बना था, लेकिन इस साल दिल्ली सरकार की ओर से रक्षा मंत्रालय को कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया। यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रशासनिक व्यस्तता या किसी और कारण से दिल्ली ने अपना पक्ष रखने का मौका गँवा दिया?
दूसरी ओर, हरियाणा की कहानी और भी दिलचस्प और दुखद है। हरियाणा सरकार ने एक-दो नहीं, बल्कि पूरे पांच प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजे थे। उम्मीद की जा रही थी कि हिसार के राखीगढ़ी (सिंधु घाटी सभ्यता का स्थल) पर आधारित झांकी को हरी झंडी मिल जाएगी, लेकिन अंतिम दौर में विशेषज्ञ समिति ने इसे भी खारिज कर दिया।
झांकियों का चयन करने वाली कमेटी ने तीन दौर की कड़ी बैठकों के बाद केवल 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस बार परेड में शामिल होने की अनुमति दी है। एक तरफ जहां चयनित राज्यों में खुशी का माहौल है और तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं, वहीं दिल्ली और हरियाणा का न होना एक बड़ा खालीपन छोड़ गया है। गणतंत्र दिवस की यह परेड इस बार कुछ राज्यों के लिए गर्व का क्षण होगी, तो कुछ के लिए अगले साल की लंबी प्रतीक्षा की शुरुआत।


