अरावली की नई परिभाषा ने मचाई हलचल, उदयपुर से गुरुग्राम तक विरोध-प्रदर्शन तेज

अरावली पर्वत की नई परिभाषा को लेकर देशभर में विरोध का माहौल बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पैनल की सिफारिश को मंजूरी दी है, जिसके तहत अरावली की परिभाषा में बड़ा बदलाव किया गया है। इस बदलाव के कारण पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय लोग खासे नाराज हैं। राजस्थान के उदयपुर से लेकर हरियाणा के गुरुग्राम तक वकीलों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और आम जनता ने विरोध प्रदर्शन किए। सोशल मीडिया पर #SaveAravalli आंदोलन तेज़ी से ट्रेंड कर रहा है और लोग इस बदलाव को पारिस्थितिक संकट के रूप में देख रहे हैं।
नई परिभाषा के मुताबिक, अब अरावली पर्वत की उस ज़मीन को अरावली माना जाएगा, जो स्थानीय ऊंचाई से 100 मीटर या उससे ऊपर हो। इसका मतलब है कि जो अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा 100 मीटर से कम ऊंचाई पर है, उसे अब अरावली नहीं माना जाएगा। इससे इस इलाके में खनन और निर्माण की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जो पारिस्थितिक संतुलन को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम नेशनल कैपिटल रीजन में हवा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान के 15 जिलों में फैली अरावली की कुल भूमि में से केवल 8.7 प्रतिशत क्षेत्र 100 मीटर से अधिक ऊंचाई पर है। जबकि 20 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र हवा रोकने वाले प्राकृतिक बैरियर का काम करते हैं। इस नई परिभाषा से यह प्रभाव कम हो सकता है और इससे कई पर्यावरणीय जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।


