उत्तर प्रदेश

ग्रामीण साजिश का खुलासा: मास्टरमाइंड बबलू कोटेदार और पंचायत मित्र बुद्धिलाल ने ग्राम प्रधान की चाल में फंसकर कर दिया दिमाग का ‘काम’!

उन्नाव में ग्राम प्रधान की गुंडागर्दी, कुष्ठ रोगी विधवा से जबरन अंगूठा लगवाकर झूठा बयान, सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप सारी घटना का मास्टरमाइंड गांव का ही कोटेदार*

उन्नाव जिले के ग्राम तालिब नगर गांव में सरकारी योजनाओं से आज भी वंचित एक गरीब परिवार विधवा महिला कुसुमा देवी के साथ ग्राम प्रधान और पंचायत मित्र बुद्धीलाल की गुंडागर्दी ने जंगल राज का नंगा चेहरा उजागर कर दिया है। कुष्ठ रोग से पीड़ित कुसुमा, जिनके पति की मौत करीब 10 साल पहले हो चुकी है तथा वह अपनी पाँच बेटियों को किस तरह पाल रही ये कोई नहीं जानता है व दो बेटियां दिव्यांग हैं, जिनमे से एक लड़की को दिखाई ही नहीं देता है लेकिन एक दिन जब कुसुमा को गांव का ही कोटेदार पेंशन का नाम बहना कर के उसको अपने घर ले जाता है और घर ले जाकर अपना मुख्य दरवाजा बंद कर देता है जिसमें पहले से ही गांव के प्रधान और पंचायत मित्र बुद्धि लाल मौजूद थे उसके बाद कुसुमा को धमकी दी जाती है के बुद्धि लाल धमकी देता है कि हम आपकी लड़कियों को मार देंगे या आपकी लड़कियों को ऐसा कर देंगे की कहीं पर आपकी लड़की मुंह दिखाने के लायक नहीं बचेंगी तथा और इसके बाद फिर क्या था जो प्रधान और बुद्धिलाल ने जैसा सोचा था वही किया कुसुमा से कोरे कागज पर अंगूठा लगवा लिया और जो भी लिखना था वो सब लिख डाला जिससे गांव का प्रधान और पंचायत मित्र बच सके बाद में उसी कागज पर लिख दिया गया कि पहले मैंने जो भी आरोप लगाया था वो ग़लत है जिसमें 15 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी वो भी ग़लत है यह घटना न केवल ग्रामीण स्तर पर भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को दर्शाती है, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवाल खड़े करती है।
कुसुमा देवी की कहानी दिल दहला देने वाली है। सरकारी पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से महरूम इस विधवा को ग्राम प्रधान और पंचायत मित्र ने लालच देकर फंसाया। उन्होंने कहा कि ‘पेंशन का फॉर्म भर देंगे, बस अंगूठा लगा दो।’ लेकिन कोरे कागज पर अंगूठा लगते ही सारी साजिश सामने आ गई। उस कागज पर बाद में लिखा गया: ‘अब तक जो भी आरोप मैंने लगाए हैं, 15 हजार रुपये वाली बात भी झूठी है। अब मुझे इनसे कोई शिकायत नहीं है।’ यह सब गांव के कोटेदार बब्लू की साजिश का हिस्सा था, जिन्होंने कुसुमा को घर से बुलाया और प्रधान के पास ले जाकर धमकाया। कोटेदार ने बहाने बनाए कि ‘प्रधान जी पेंशन फॉर्म भर रहे हैं, चलो आओ।’ लेकिन वहां पहुंचते ही महिला को जबरन कोरे कागज पर साइन करा लिया गया। लेकिन जब वहां पर जन संकल्प न्यूज़ की टीम पहुंची है तो वहां के कोटेदार बबलू से बात हुई तो कोटेदार ने ख़ुद कहा कि मुझसे गलती हुई है जो मैं कुसुमा को लेकर वहाँ से आया था और अपने घर के अंदर बिठाया था तथा उन्होंने ये भी बताया की मैंने जो भी किया था वो प्रधान जी और बुद्धिलाल के कहने पर किया था।
इसके बाद जन संकल्प न्यूज़ की टीम ने प्रधान जी बात की तो उन्होंने भी काफ़ी लोगों के सामने माफ़ी माँगी और कहा कि कुसुमा को पेंशन का नाम कह कर ले जाना व कोटेदार के घर कि अंदर बैठना ग़लत था और जो अंगूठा का निशान लिया वो भी ग़लत था उसके लिए मैं माफ़ी चाहता हूँ व उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे किसी को ले जाना और ले जाकर किसी के घर मैं बिठाना ग़लत है मुझे ये सारे फ़ैसले कुसुमा के घर पर करने चाहिए थे ये सारी बातें वही पर मौजूद ग्राम पंचायत अधिकारी सुनील त्रिवेदी व ठाकुर प्रसाद , सत्य नारायण ,राम बालक , आदि लोग मौजूद थे इतना ही नहीं, पत्रकारों को भी धमकी भरे फोन कराए गए, ताकि मामला दब जाए।                                                यह पहली बार नहीं है जब कुसुमा ने इन अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाई हो। कुछ दिनों पहले समाचार चैनलों पर यह खुलासा हुआ था कि पंचायत मित्र बुद्धीलाल शौचालय निर्माण के नाम पर 15 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। कुसुमा ने खुद चैनलों के सामने बयान दिया था, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि बिना रिश्वत के काम नहीं हो रहा। इतना ही नहीं, उन्नाव के जिलाधिकारी को लिखित प्रार्थना पत्र भी सौंपा गया था। डीएम ने जांच कर कार्यवाही का आश्वासन दिया था, लेकिन न तो कोई जांच हुई और न ही दोषियों पर कोई एक्शन लिया गया। इस लापरवाही ने प्रधान और पंचायत मित्र का हौसला इतना बढ़ा दिया कि वे अब खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आए। कुसुमा की हालत देखकर कोई भी इंसान का दिल पसीज जाए। कुष्ठ रोग से जूझ रही यह महिला अकेली ही दो दिव्यांग बेटियों का पालन-पोषण कर रही है। पति की मौत के बाद से परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, लेकिन सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की बजाय उन्हें धमकियां और धोखा मिल रहा है।
यह घटना उन्नाव जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार का सिर्फ एक उदाहरण है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था का दुरुपयोग आम हो चुका है। प्रधान और पंचायत मित्र जैसे पदाधिकारी गरीबों का शोषण कर रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने भाषणों में हमेशा ‘जीरो टॉलरेंस’ पर भ्रष्टाचार के प्रति सख्ती की बात करते हैं। वे कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार का सफाया हो गया है, लेकिन तालिब नगर जैसी घटनाएं साबित करती हैं कि यह दावा खोखला है। बल्कि, भ्रष्टाचारियों का हौसला बढ़ाया जा रहा है। जिलाधिकारी का आश्वासन झूठा साबित हुआ, जो प्रशासनिक नाकामी को उजागर करता है। क्या यह वही ‘उत्तर प्रदेश’ है जिसकी तारीफ योगी जी करते हैं? या फिर यह जंगल राज का नया रूप है, जहां गरीब विधवाओं को न्याय के बजाय धमकियां मिलती हैं?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि तालिब नगर जैसे गांवों में सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित हैं। पेंशन, शौचालय, आवास सबका लाभ अमीरों और प्रभावशाली लोगों को मिलता है। कुसुमा जैसी महिलाओं तो बस ठुकराई जाती हैं। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘प्रधान साहब गांव के राजा हैं। कोई शिकायत करे तो घर तोड़ देंगे।’ यह डर का माहौल ही है जो भ्रष्टाचार को पनपने देता है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले पर सवाल उठाए हैं। वहीं ग्रामीण या कहते नजर आए कि, ‘योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति सिर्फ चुनावी जुमला है। असल में भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है।’
अब सवाल यह है कि कुसुमा को न्याय कब मिलेगा? क्या इस घटना पर उच्च स्तरीय जांच होगी? मुख्यमंत्री कार्यालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग हो रही है। कुसुमा ने रोते हुए कहा, ‘मैं तो बस अपने बच्चों का पेट पालना चाहती हूं। ये लोग मुझे जिंदा दफना देंगे।’ उनकी पुकार को अनसुना नहीं किया जा सकता। उन्नाव प्रशासन को तुरंत प्रधान और पंचायत मित्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। साथ ही, कुसुमा को सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह साबित हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश में गरीबों के लिए न्याय सिर्फ एक सपना है।

अब देखना यह होगा कि दोषियों पर जिलाधिकारी महोदय जी क्या कार्यवाही करते हैं?

रिपोर्ट-हितेश कुमार,चीफ रिपोर्टर,जन संकल्प न्यूज़ 

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