प्राइमरी पाठशाला बना नीलामी का अड्डा, बच्चों की शिक्षा की जगह हो रही मछली की बोली, रविवार को भी खुला स्कूल
ब्लॉक सिकंदरपुर सिरोशी के थाना माखी क्षेत्र में स्थित इस स्कूल में रविवार के दिन भी ताला नहीं लगता, लेकिन यह बच्चों की पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि भदनी नदी में मछली पकड़ने के अधिकारों की नीलामी के लिए खुला रहता है।

उन्नाव, 5 अक्टूबर 2025: शिक्षा का मंदिर कहलाने वाली प्राइमरी पाठशालाएं बच्चों के भविष्य को संवारने का आधार होती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के ग्राम नगवा में एक प्राइमरी स्कूल ने शिक्षा के मंदिर की गरिमा को तार-तार कर दिया है। ब्लॉक सिकंदरपुर सिरोशी के थाना माखी क्षेत्र में स्थित इस स्कूल में रविवार के दिन भी ताला नहीं लगता, लेकिन यह बच्चों की पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि भदनी नदी में मछली पकड़ने के अधिकारों की नीलामी के लिए खुला रहता है। यह न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और कुछ व्यक्तियों की मनमानी को भी उजागर करता है। जन संकल्प न्यूज की टीम ने 5 अक्टूबर 2025 को इस घटना को स्वयं देखा और स्थानीय लोगों से बातचीत कर इस घोटाले की परतें खोलीं।
ग्राम नगवा एक छोटा सा गांव है, जहां की आबादी मुख्य रूप से कृषि और मछली पालन पर निर्भर है। गांव से होकर गुजरने वाली भदनी नदी स्थानीय लोगों के लिए जीवन रेखा है। यह नदी भदनी, गड़ी, परमाणी, अल्मोड़ा और नगवा जैसे कई गांवों से होकर गुजरती है और अंततः गंगा में मिल जाती है। नदी में मछलियां प्रचुर मात्रा में पाई जाती हैं, जो ग्रामीणों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। लेकिन पिछले पांच वर्षों से इस नदी के मछली पकड़ने के अधिकारों की नीलामी एक व्यक्ति, संजय, द्वारा की जा रही है। यह नीलामी प्राइमरी स्कूल के परिसर में आयोजित होती है, जो नगर निगम के दायरे में आता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संजय पिछले पांच साल से हर साल इस नीलामी का आयोजन करता है। नीलामी की बोली 10,000 रुपये से शुरू होकर 1,00,000 रुपये तक पहुंचती है। इस दौरान जमा होने वाली पूरी राशि संजय अपने पास रखता है। वह ग्रामीणों को आश्वासन देता है कि इस धन का उपयोग गांव में एक मंदिर के निर्माण के लिए किया जाएगा। हालांकि, पांच साल बीत जाने के बाद भी न तो कोई मंदिर बना और न ही इस धन का उपयोग गांव के किसी अन्य कल्याणकारी कार्य में हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि इस पैसे का हिसाब-किताब कभी सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे संजय की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।
5 अक्टूबर 2025 को जब जन संकल्प न्यूज की टीम ग्राम नगवा पहुंची, तो उन्होंने प्राइमरी स्कूल के परिसर में नीलामी की गतिविधि को अपनी आंखों से देखा। इस दौरान संजय के साथ कई अन्य लोग भी मौजूद थे, जिनमें संदीप पुत्र चेतराम, राम खिलावन पुत्र राम लाल, कमल पुत्र शिव दयाल, राम प्रसाद पुत्र गजा, और कुंवारे पुत्र परसादी शामिल थे। ये लोग भदनी नदी के मछली पकड़ने के अधिकारों की बोली लगा रहे थे। स्कूल का परिसर, जो बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को संवारने का स्थान होना चाहिए, वहां इस तरह की व्यावसायिक गतिविधि देखकर स्थानीय लोग भी आक्रोशित हैं।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। पहला, प्राइमरी स्कूल जैसे शैक्षिक संस्थान का दुरुपयोग इस तरह की गतिविधियों के लिए क्यों हो रहा है? दूसरा, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन इस अवैध नीलामी पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? तीसरा, नीलामी से प्राप्त धन का कोई हिसाब-किताब क्यों नहीं है? ग्रामीणों का कहना है कि यह गतिविधि न केवल स्कूल की पवित्रता को ठेस पहुंचाती है, बल्कि बच्चों के भविष्य को भी खतरे में डालती है। स्कूल में पढ़ाई के बजाय इस तरह की गतिविधियां होने से बच्चों का शैक्षिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों ने इस मामले में प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में स्कूल परिसर का उपयोग केवल शिक्षा के लिए हो। कुछ ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया कि नदी के मछली पकड़ने के अधिकारों की नीलामी यदि होनी ही है, तो उसे पारदर्शी तरीके से और प्रशासन की देखरेख में किया जाए, ताकि उसका लाभ पूरे गांव को मिले।
यह घटना शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है। प्राइमरी स्कूल, जो बच्चों के लिए ज्ञान का मंदिर होना चाहिए, वहां इस तरह की गतिविधियां न केवल शर्मनाक हैं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी हैं। प्रशासन को इस मामले की गहन जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षा के मंदिर की गरिमा बरकरार रहे।



इस गांव में धर्म परिवर्तन भी हो रहा है लोग अपना धर्म छोड़कर ईसाई बन रहें हैं