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नारी शक्ति का सहारा, फिर भी CM नीतीश क्यों बन जाते हैं विवादों का शिकार?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दो दशक से अधिक समय से राज्य की सत्ता पर काबिज हैं, जिसका श्रेय काफी हद तक महिला मतदाताओं के अटूट समर्थन को जाता है। लालू राज खत्म करने के बाद, उन्होंने लड़कियों के लिए साइकिल योजना, जीविका समूह (स्वयं सहायता समूह), और पूर्ण शराबबंदी जैसे साहसिक कदम उठाए, जिसने उन्हें ‘सुशासन बाबू’ की उपाधि दिलाई। महिलाओं के सशक्तिकरण के कारण ही उनकी लगातार 10वीं बार सीएम पद पर जीत संभव हुई।

हालांकि, महिलाओं के उत्थान के लिए काम करने वाले नीतीश कुमार कई बार अपने अजीबोगरीब व्यवहार के कारण विवादों में घिर जाते हैं और उनकी छवि पर असर पड़ता है।

हिजाब हटाने की घटना: पटना में नवनियुक्त डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र देते समय, मुख्यमंत्री ने एक महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब हटा दिया, जिसका वीडियो वायरल होने पर विपक्षी दलों (RJD, कांग्रेस) ने उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए।

चुनाव प्रचार में माला: पिछले विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान, मुजफ्फरपुर में उन्होंने BJP की महिला प्रत्याशी रमा निषाद को माला पहना दी, जो भारतीय सामाजिक परंपरा के विपरीत था। सांसद संजय झा द्वारा रोकने की कोशिश पर उन्होंने उन्हें फटकार भी लगाई।

अजीब व्यवहार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में उन्होंने एक महिला पुरस्कार विजेता को सम्मानित करते हुए उनका हाथ पकड़ा और बाद में कंधे पर हाथ रखा।

आपत्तिजनक टिप्पणियाँ: नवंबर 2023 में विधानसभा में आरक्षण प्रस्ताव के दौरान उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण पर महिलाओं को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी, जिस पर भारी हंगामा मचा और बाद में उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी। इससे पहले जनवरी 2023 में भी उनका एक आपत्तिजनक बयान वायरल हुआ था।

महिलाओं के दम पर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने वाले नीतीश कुमार, अपनी हरकतों से बार-बार विवादों में आकर विपक्ष को उन पर हमलावर होने का मौका देते रहते हैं, जिससे उनकी छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

क्या आप इस घटना से जुड़ा कोई और विवरण जानना चाहेंगे, या मैं आपके लिए कोई अन्य राष्ट्रीय समाचार देखूं?

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