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India Gate protest: दिल्ली इंडिया गेट प्रदूषण विरोध प्रदर्शन में नक्सली समर्थन के नारे, 23 गिरफ्तार, एक महिला की जमानत ठुकराई गई

India Gate protest: 23 नवंबर की शाम दिल्ली के इंडिया गेट पर वायु प्रदूषण के खिलाफ एक प्रदर्शन आयोजित किया गया था। यह प्रदर्शन शुरू में प्रदूषण की समस्या को लेकर था, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने नक्सली नेता मदवी हिदमा के समर्थन में नारे लगाए। हिदमा देश के सबसे खोजे जाने वाले नक्सली कमांडरों में से एक हैं। प्रदर्शन के दौरान हिदमा के पोस्टर भी लगाए गए, जिनमें उन्हें आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के समान एक जल, जंगल और जमीन के रक्षक के रूप में दिखाया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर मिर्च स्प्रे किया, जिससे तीन-चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने इस घटना के बाद 23 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था।

अधिकांश आरोपियों को मिली जमानत

गिरफ्तार आरोपियों में से कई को पुलिस ने पूछताछ के बाद जमानत दे दी, लेकिन एक महिला इलाकिया की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। हाल ही में उनके जमानत आवेदन पर कोर्ट ने सुनवाई की, जिसमें नौ में से दस आरोपियों को जमानत मिली जबकि इलाकिया को छोड़ दिया गया। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ उग्रवादी या नक्सली संगठन से जुड़े होने के ठोस सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए अधिकांश को जमानत दी गई। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

India Gate protest: दिल्ली इंडिया गेट प्रदूषण विरोध प्रदर्शन में नक्सली समर्थन के नारे, 23 गिरफ्तार, एक महिला की जमानत ठुकराई गई

इलाकिया की जमानत क्यों खारिज हुई?

अदालत ने बताया कि इलाकिया ने हिदमा के समर्थन में नारे लगाए थे और वह कथित तौर पर रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (RSU) की सदस्य है। RSU एक प्रतिबंधित नक्सली फ्रंट संगठन माना जाता है। अदालत ने कहा कि RSU के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जांच अभी जारी है। इलाकिया पर आरोप है कि उसने इस पूरे प्रदर्शन की योजना बनाई थी और उसे छोड़ देने से वह ऐसी गतिविधियां जारी रख सकती है। इसके अलावा, वह अन्य लोगों को भी सूचित कर सकती है जिससे वे फरार हो सकते हैं। इसलिए उसकी जमानत याचिका खारिज की गई।

पुलिस और बचाव पक्ष के दावे और तर्क

पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने नक्सली समर्थक नारे लगाए और इस तरह की गतिविधि में शामिल रहे। वहीं बचाव पक्ष ने इस आरोप का खंडन किया और कहा कि आरोपियों का किसी नक्सली संगठन से कोई संबंध नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपित अपराधों के लिए अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है, इसलिए जमानत एक कानूनी अधिकार है। अदालत ने सबूतों की कमी को ध्यान में रखते हुए अधिकांश आरोपियों को जमानत दी, लेकिन इलाकिया के मामले में संभावित खतरे और जांच की गहराई को देखते हुए फैसला अलग रखा।

प्रदर्शन की शुरुआत और हिंसक घटनाक्रम

यह प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन शाम के समय शुरू हुआ था, जिसमें कई लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शन में हिदमा के पोस्टर लगाए गए, जिनमें उन्हें आदिवासी समाज का संरक्षक बताया गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर मिर्च स्प्रे किया, जिससे पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 23 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से कुछ को जमानत मिल चुकी है जबकि कुछ अभी जेल में हैं। यह घटना दिल्ली की राजधानी में प्रदूषण के प्रति बढ़ती चिंता के बीच हुई, लेकिन नक्सली समर्थक नारों ने इस प्रदर्शन को विवादित बना दिया।

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