बसपा सुप्रीमो मायावती ने जयप्रकाश सिंह को ओडिशा-पश्चिम बंगाल का प्रभार सौंपा: वापसी पर मिली बड़ी जिम्मेदारी
सिंह ने कहा, "बहनजी के आदेशों का पालन कर संगठन को मजबूत बनाऊंगा। जल्द ही बंगाल जाऊंगा।"

लखनऊ, 10 नवंबर 2025 (संवाददाता): बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह को ओडिशा और पश्चिम बंगाल का प्रभार सौंप दिया है। आठ वर्षों बाद बसपा में दुबारा वापसी करने वाले सिंह को यह जिम्मेदारी दिल्ली में मायावती से मुलाकात के तुरंत बाद दी गई। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो पूर्वी भारत में बसपा के विस्तार की नई रणनीति का हिस्सा है।
जयप्रकाश सिंह बसपा के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हैं। 2013-2018 तक वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नेशनल कोऑर्डिनेटर थे। 2018 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर अभद्र टिप्पणी (उन्हें ‘विदेशी खून’ बताने) के कारण मायावती ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उसके बाद सिंह ने कई बार सार्वजनिक माफी मांगी और वापसी की अपील की। हाल ही में प्रयागराज के होलागढ़ में दलित स्वाभिमान महासम्मेलन में उन्होंने भावुक अपील की, जिसका वीडियो वायरल हो गया। मायावती ने उनकी निष्ठा पर भरोसा जताते हुए उन्हें माफ कर लिया। सिंह ने कहा, “बहनजी के आदेशों का पालन कर संगठन को मजबूत बनाऊंगा। जल्द ही बंगाल जाऊंगा।”
यह नियुक्ति बसपा की 2027 उत्तर प्रदेश चुनावी रणनीति का हिस्सा लगती है। मायावती ने अगस्त 2025 में 22 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए थे, जिसमें बंगाल के लिए मनोज हवलदार और ओडिशा के लिए सरोज कुमार नायक शामिल थे। लेकिन सिंह को प्रभार देकर पार्टी ने संगठनात्मक मजबूती पर जोर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सिंह का अनुभव दलित-बहुजन वोट बैंक को एकजुट करने में सहायक होगा। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता के बावजूद बसपा सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। ओडिशा में भी बीजू जनता दल की मजबूत पकड़ को चुनौती देने का प्रयास होगा।
सोशल मीडिया पर बसपा कार्यकर्ताओं ने सिंह की नियुक्ति का स्वागत किया। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #JaiBhIm और #BSP_Organisation_Strong ट्रेंड कर रहा है। एक पोस्ट में लिखा गया, “बहनजी का विजन, जयप्रकाश का नेतृत्व—अब पूर्वी भारत में हाथी का बिगुल बजेगा।” सिंह की वापसी से पार्टी में उत्साह है, लेकिन आलोचक इसे मायावती की उत्तराधिकारी खोज का संकेत मान रहे हैं। सिंह ने कहा, “यह सामूहिक उपलब्धि है। बहनजी के मार्गदर्शन में बसपा सबकी पार्टी बनेगी।”
यह कदम बसपा को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पूर्वी राज्यों में दलित-ओबीसी एकता से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी। मायावती का यह फैसला 2027 के यूपी चुनावों से पहले संगठन को गति देगा।


