उत्तर प्रदेश

माखी थाना क्षेत्र में जातीय उत्पीड़न की घटना: महिला ने लगाया गला दबाने और धमकाने का आरोप, पुलिस पर निष्क्रियता का सवाल

उन्नाव, 16 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के माखी थाना क्षेत्र में जातीय भेदभाव और हिंसा की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। स्थानीय निवासी शारदा, पत्नी धनपति चमार, ने आरोप लगाया है कि बीते 13 अक्टूबर को शाम करीब 9 बजे उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं, धमकाया गया और गला दबाकर हमला किया गया। इस घटना ने क्षेत्र में जातीय तनाव को फिर से उजागर कर दिया है, जहां दलित समुदाय अक्सर ऐसे उत्पीड़न का शिकार होता है।

शारदा ने बताया कि वह मनोज यादव के घर से महिला समूह की किश्त (लोन की किस्त) वसूल कर वापस लौट रही थीं। रास्ते में कल्लू यादव का प्लॉट पड़ता है, जहां कल्लू ने उन्हें रोका। आरोप है कि कल्लू ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “ये रास्ता तुम लोगों के लिए नहीं है।” जब शारदा ने विरोध जताया, तो कल्लू ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उनका गला दबा दिया। शारदा रोती हुई घर पहुंचीं और अगले दिन माखी थाने में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन तीन दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

यह घटना दलित महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार की ओर इशारा करती है। भारत में अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है, लेकिन यहां पुलिस की सुस्ती सवाल खड़े कर रही है। क्या माखी थाना पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है? या फिर ऐसे अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है? स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जातीय हिंसा आम है, और पुलिस की निष्क्रियता से अपराधी बेखौफ हो जाते हैं।

शारदा के पति धनपति चमार ने कहा, “हम गरीब हैं, लेकिन न्याय की उम्मीद है। अगर पुलिस नहीं सुनेगी, तो हम उच्च अधिकारियों से गुहार लगाएंगे।” वहीं, कल्लू यादव की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। माखी थाने के एसएचओ से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि जांच चल रही है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

यह मामला उन्नाव जिले में जातीय असमानता की गहरी जड़ों को दर्शाता है। हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन दोषसिद्धि दर कम है। सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सरकार ऐसे मामलों में सख्ती बरते और पुलिस को जवाबदेह बनाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घटना बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।

शारदा की शिकायत में साफ है कि यह सिर्फ एक रास्ते का विवाद नहीं, बल्कि जातीय घृणा से प्रेरित हमला है। समाज को ऐसे मामलों पर चुप नहीं रहना चाहिए। पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार करना चाहिए। अन्यथा, न्याय व्यवस्था पर सवाल उठेंगे।

ब्यूरो रिपोर्ट- संदीप कुमार,जन संकल्प न्यूज 

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