RSS Meeting: जोधपुर में RSS की तीन दिवसीय बैठक शुरू, 32 संगठनों के 320 प्रतिनिधि करेंगे भागीदारी

RSS Meeting: RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक शुक्रवार से राजस्थान के जोधपुर में शुरू हो रही है। इस बैठक में संघ से जुड़े 32 संगठनों के कुल 320 प्रतिनिधि भाग लेंगे। बैठक का उद्देश्य विभिन्न संगठनों के बीच आपसी समन्वय स्थापित करना है। हालांकि बैठक में किसी प्रकार के निर्णय लेने का उद्देश्य नहीं है।
बैठक में कौन-कौन होंगे शामिल
इस बैठक में बीजेपी, विश्व हिंदू परिषद, स्वदेशी जागरण मंच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, संस्कार भारत, सेवा भारती और मजदूर संगठन जैसे प्रमुख संगठन शामिल हैं। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक का मकसद संगठनों के बीच सामंजस्य और तालमेल बढ़ाना है। बैठक आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की उपस्थिति में सुबह 9 बजे शुरू होगी और यह 7 सितंबर तक चलेगी।
महिला स्वयंसेविकाओं के समन्वय पर विशेष चर्चा
बैठक में महिला स्वयंसेविकाओं के समन्वय पर विशेष रूप से चर्चा होगी। यह पहल संगठनों के भीतर महिलाओं की भूमिका को मजबूत बनाने और उनके कामकाज को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए की जा रही है। इस बैठक को राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी के अध्यक्ष चुनाव से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि आंबेकर ने स्पष्ट किया कि बीजेपी अपनी नेतृत्व चयन प्रक्रिया में सक्षम है और इस बैठक में इसके बारे में कोई चर्चा नहीं होगी।

संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान
बैठक के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 75 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति की अटकलों का खंडन किया। ‘आरएसएस यात्रा के 100 वर्ष: नए आयाम’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन भागवत ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने कभी अपने लिए या किसी और के लिए 75 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति की बात नहीं की। उनका कहना था कि संघ में योगदान और सेवा उम्र की सीमा से नहीं, बल्कि समर्पण और जिम्मेदारी से जुड़ा है।
बैठक का महत्व और अपेक्षित प्रभाव
इस बैठक का महत्व केवल संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने तक सीमित नहीं है। इससे संघ से जुड़े विभिन्न संगठन अपने कार्यक्षेत्र और प्रभाव को मजबूत करने के अवसर प्राप्त करेंगे। बैठक में भाग लेने वाले 320 प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे और आगामी गतिविधियों के लिए दिशा-निर्देश प्राप्त करेंगे। यह बैठक न केवल संगठनात्मक मजबूती बढ़ाने का अवसर है, बल्कि आरएसएस की रणनीतिक रूपरेखा को भी स्पष्ट करने का माध्यम बन रही है।



