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वैश्विक तापमान में वृद्धि, श्रमिकों के स्वास्थ्य और आजीविका पर बढ़ता संकट

2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा, जिसमें वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति-पूर्व स्तर से 1.55 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने 22 अगस्त 2025 को एक संयुक्त रिपोर्ट में चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और ताप लहरें श्रमिकों के स्वास्थ्य और आजीविका के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं। “जलवायु परिवर्तन और कार्यस्थल पर गर्मी का तनाव” नामक इस रिपोर्ट के अनुसार, विश्व भर में 2.4 अरब श्रमिक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में हैं, जिससे हर साल 2.3 करोड़ कार्यस्थल से जुड़ी चोटें और 18,970 मौतें हो रही हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा, जिसमें वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति-पूर्व स्तर से 1.55 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। कई क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर और कुछ में 50 डिग्री तक पहुंच गया। इससे विशेष रूप से कृषि, निर्माण, और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिक सबसे अधिक प्रभावित हैं। गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक, निर्जलीकरण, गुर्दे की बीमारियां, और तंत्रिका संबंधी विकारों का जोखिम बढ़ रहा है। तापमान में प्रत्येक डिग्री की वृद्धि से उत्पादकता 2-3% तक घट रही है।

विकासशील देशों में बुजुर्ग, बच्चे, और गरीब समुदाय विशेष रूप से संवेदनशील हैं। WHO के सहायक महानिदेशक डॉ. जैरेमी फरार ने कहा, “गर्मी का तनाव अरबों श्रमिकों के स्वास्थ्य और जीविका को नुकसान पहुंचा रहा है।” WMO की उप-महासचिव को बैरेट ने जोड़ा कि यह समस्या अब केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि यूरोप जैसे ठंडे क्षेत्रों में भी फैल रही है।

रिपोर्ट सात समाधान सुझाती है, जिनमें स्थानीय मौसम के आधार पर नीतियां, श्रमिकों को प्रशिक्षण, और किफायती तकनीकों का उपयोग शामिल है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, गर्मी से निपटने के लिए वैश्विक कार्रवाई जरूरी है, जो न केवल स्वास्थ्य बल्कि आर्थिक स्थिरता और सतत विकास लक्ष्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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