Assam चुनाव से पहले CM हिमंत का बयान, मिया मुसलमानों पर सियासी तूफान

Assam: देश के पांच राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और इनमें असम सबसे ज्यादा चर्चा में बना हुआ है। इसकी वजह राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के लगातार दिए जा रहे विवादित बयान हैं। गुरुवार को उन्होंने एक बार फिर ऐसा बयान दिया जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर कहा कि मुसलमानों को इस हद तक परेशान किया जाना चाहिए कि वे असम छोड़ने को मजबूर हो जाएं। चुनावी माहौल में आए इस बयान ने राज्य की राजनीति को और ज्यादा गरमा दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह की भाषा सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है और समाज को बांटने का काम करती है।
‘मिया मुसलमान’ बयान से उठा सियासी तूफान
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ‘मिया मुसलमान’ संबंधी बयान पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि वे ‘मिया मुसलमानों’ के खिलाफ हैं और उन्हें असम से बाहर करने के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं। असम में भाजपा की ओर से अक्सर ‘मिया’ शब्द का इस्तेमाल बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए किया जाता है जिन्हें अवैध प्रवासन से जोड़कर देखा जाता है। हिमंत ने खुलकर कहा कि वह किसी तरह की बात छिपा नहीं रहे हैं और सीधे तौर पर ‘मिया’ समुदाय के खिलाफ हैं। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस समेत कई दलों ने इसे नफरत फैलाने वाला और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
बांग्लादेशी घुसपैठ और एसआईआर से जोड़कर दिया बयान
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में यह भी दावा किया कि असम में बांग्लादेशी नागरिक मौजूद हैं और इस मुद्दे को उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जोड़कर देखा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे बिना डर के ऐसे लोगों का विरोध करें और उन्हें परेशान करें। हिमंत का कहना था कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह समुदाय पूरे असम में फैल जाएगा। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर कांग्रेस ने पहले इस मुद्दे पर सख्ती दिखाई होती तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते। इस बयान ने प्रशासनिक और संवैधानिक सीमाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस का विरोध और भाजपा की सफाई
मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे समाज को बांटने वाला बताया। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि इस तरह के बयान देश और राज्य दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। उनका कहना था कि ऐसे शब्दों से सामाजिक शांति भंग हो सकती है और इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो देश में बड़ा तनाव पैदा हो सकता है। वहीं भाजपा ने सफाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का बयान किसी समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के संदर्भ में था। भाजपा नेताओं का कहना है कि बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया जा रहा है। चुनाव से पहले असम में यह मुद्दा अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।



