उत्तर प्रदेश

UP News: आंख की दो बार हुई सर्जरी, पर निकला गंभीर डॉक्टर का भेद—जानिए पूरी कहानी

UP News: नोएडा जिला अस्पताल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मरीज ने अस्पताल के एक डॉक्टर पर नेग्लिजेंस का आरोप लगाया है। मरीज का कहना है कि उसकी आंख की सर्जरी दो बार हुई लेकिन तब भी उसकी समस्या नहीं सुधरी। जब वह तीसरी बार डॉक्टर के पास गया, तो डॉक्टर ने साफ कह दिया कि उसकी आंख अब ठीक नहीं हो सकती। इस मामले ने सरकारी अस्पतालों की विश्वसनीयता पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

मरीज की कहानी: दो बार ऑपरेशन और आंख की बिगड़ती हालत

पीड़ित, स्वराज सिंह, ने बताया कि उन्होंने नवंबर 18 और 19 को अपनी धुंधली दृष्टि और कम होती नजर की शिकायत लेकर नोएडा जिला अस्पताल का रुख किया। डॉक्टर ने जांच के बाद सर्जरी की सलाह दी। स्वराज के अनुसार, पहली सर्जरी के बाद भी समस्या जस की तस बनी रही, फिर उसी आंख की दूसरी सर्जरी की गई। पर डॉक्टर ने यह नहीं बताया कि पहली सर्जरी में क्या गलती हुई। बाद में जब आंख की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो डॉक्टर ने साफ कहा कि अब आंख ठीक नहीं हो सकती। इसके अलावा, स्वराज ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए लेंस बाहर से खरीदने को कहा, जो कि सरकारी अस्पताल में अनुचित था।

निजी अस्पताल में छिपा सच: तीन लेंस निकाले गए

सरकारी अस्पताल से निराश होकर स्वराज ने निजी अस्पताल में इलाज करवाया। वहां जांच और ऑपरेशन के दौरान पता चला कि उनकी आंख में तीन लेंस लगे हुए थे। डॉक्टरों ने बताया कि एक ही आंख में एक से ज्यादा लेंस होना बड़ी लापरवाही है और इससे आंख को स्थायी नुकसान हो सकता है। इस खुलासे ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच समिति बनी, न्याय की उम्मीद

नोएडा जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि मरीज की शिकायत मिलने के बाद अस्पताल में जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। स्वराज सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी जिंदगी लापरवाही के कारण बर्बाद हो गई है और वे दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। यह मामला सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और जवाबदेही पर फिर से सवाल उठा रहा है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है कि आखिर न्याय होता है या यह मामला फाइलों में दब जाएगा।

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