उत्तर प्रदेश

माखी थाना क्षेत्र के दिलवल गांव में डॉक्टर की लापरवाही से 50 वर्षीय व्यक्ति की मौत, परिजन गमगीन, डॉक्टर फरार

  • माखी थाना क्षेत्र के दिलवल गांव में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। गांव के 50 वर्षीय राजकुमार की स्थानीय क्लिनिक में इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर दीपू पाल की घोर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। घटना के बाद डॉक्टर  दीपू क्लिनिक बंद कर फरार हो गया और उसका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ है। मृतक की बेटी ने आंसुओं भरी आंखों से जन संकल्प न्यूज को पूरी घटना का दर्दनाक वर्णन किया, जिससे डॉक्टर की गैर-जिम्मेदारी साफ झलकती है।
    घटना का विवरण
    मृतक राजकुमार की बेटी ने बताया कि उनके पिता को पिछले कुछ दिनों से हल्का बुखार था। सुबह करीब 10 बजे वे दवाई लेने स्थानीय क्लिनिक गए। दवाई लेकर घर लौटे तो उनके हाथ-पैर कांपने लगे और हालत बिगड़ने लगी। परेशान होकर परिवार दोबारा डॉक्टर के पास पहुंचा। डॉक्टर ने बिना किसी गहन जांच के कहा, “एक बात और देखकर आओ।” शाम करीब 5 बजे राजकुमार साइकिल से फिर क्लिनिक पहुंचे। डॉक्टर ने उन्हें दवाई दी और एक इंजेक्शन लगा दिया।
    घर लौटते ही राजकुमार की हालत और खराब हो गई। उन्हें चक्कर आने लगे, उलझन हुई और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजनों ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर आए, मरीज की हालत देखी और कहा, “मैं अभी आता हूं, थोड़ी देर रुकिए।” लेकिन इसके बाद डॉक्टर वापस नहीं लौटे। गांव वालों ने बताया कि डॉक्टर क्लिनिक बंद कर फरार हो चुके थे। उसी दौरान राजकुमार ने अंतिम सांस ली और परिवार हमेशा के लिए अपने मुखिया को खो बैठा।
    परिजनों का दर्द
    मृतक की बेटी ने रोते हुए कहा, “पापा को सिर्फ हल्का बुखार था, ठीक होने के बाद उनको कमजोरी लगी तभी वो दवाई लेने गए। डॉक्टर ने बिना सोचे-समझे इंजेक्शन लगा दिया। अगर सही इलाज करते तो आज पापा हमारे बीच होते।” परिवार में कोहराम मचा हुआ है। राजकुमार की पत्नी, बच्चे और अन्य परिजन सदमे में हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर ने न तो कोई टेस्ट किया, न ही मरीज की हालत को गंभीरता से लिया। इंजेक्शन लगाने के बाद भी कोई फॉलो-अप नहीं किया गया।
    पुलिस की त्वरित कार्रवाई
    घटना की सूचना मिलते ही माखी थाने के थानाध्यक्ष योगेंद्र सिंह तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से विस्तार से बातचीत की और उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। थानाध्यक्ष ने कहा, “हमने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    पोस्टमार्टम और आगे की जांच
    शव का पोस्टमार्टम उन्नाव जिला अस्पताल में किया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इंजेक्शन की वजह से मौत की पुष्टि होने पर डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
    डॉक्टर की लापरवाही पर सवाल
    यह पहला मामला नहीं है जब ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल या लापरवाह डॉक्टरों की वजह से मरीजों की जान गई हो। दिलवल गांव के लोग बताते हैं कि उक्त डॉक्टर का क्लिनिक लंबे समय से चल रहा था, लेकिन उसकी योग्यता पर सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार सभी निजी क्लिनिकों की जांच करे और बिना लाइसेंस वाले डॉक्टरों पर तुरंत प्रतिबंध लगाए।
    परिवार की गुहार
    मृतक का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। राजकुमार मजदूरी कर परिवार चलाते थे। उनकी मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और दयनीय हो गई है। परिजनों ने सरकार से मुआवजे और बच्चों की शिक्षा-विवाह के लिए मदद की गुहार लगाई है। साथ ही, डॉक्टर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    अब देखना यह है…
    पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी। क्या फरार डॉक्टर को पकड़ा जाएगा? क्या परिवार को न्याय और आर्थिक सहायता मिलेगी? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं। जन संकल्प न्यूज इस मामले की हर अपडेट पर नजर रखे हुए है।
    ब्यूरो रिपोर्ट: संदीप कुमार, ब्यूरो चीफ, जन संकल्प न्यूज

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