सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर पत्नी ने SC में याचिका दायर की, NSA के तहत गिरफ्तारी को बताया अवैध

लद्दाख में 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी विवाद का विषय बनी हुई है। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने कहा कि वांगचुक की गिरफ्तारी अवैध है और उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। यह याचिका अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है, जो सीधे सुप्रीम कोर्ट में हाबीअस कॉर्पस के लिए अपील करने का अधिकार देता है।
जोधपुर जेल में बंद हैं वांगचुक
सोनम वांगचुक को 24 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वे राजस्थान के जोधपुर जेल में हैं। उनकी गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हुई। उनकी गिरफ्तारी लद्दाख में हुई हिंसा के बाद की गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक बताया था।
I have sought relief from the SUPREME COURT OF INDIA through a HABEAS CORPUS petition against @Wangchuk66’s detention.
It is one week today. Still I have no information about Sonam Wangchuk’s health, the condition he is in nor the grounds of detention. pic.twitter.com/P4EPzO630A— Gitanjali J Angmo (@GitanjaliAngmo) October 3, 2025
झूठे आरोपों में फंसाए गए
गीतांजलि अंगमो का कहना है कि वांगचुक को झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उन पर पाकिस्तान से संबंध होने का भी आरोप लगाया गया है, जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनका पति केवल लोगों के हित में काम कर रहे थे और उन्हें बेबुनियाद आरोपों के तहत जेल में रखा गया है।
राष्ट्रपति से मदद की अपील
गीतांजलि ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हस्तक्षेप की अपील भी की। उन्होंने राष्ट्रपति को तीन पन्नों का पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके पति को चार वर्षों से जनता की सेवा के लिए काम करने के कारण बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि उन्हें अपने पति की हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं है और उनकी तत्काल रिहाई होनी चाहिए।
बिना शर्त रिहाई की मांग
गीतांजलि ने डिप्टी कमिश्नर लेह के माध्यम से एक ज्ञापन भी भेजा। इसमें उन्होंने कहा, “हम सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं जो किसी के लिए खतरा नहीं बन सकते। उन्होंने लद्दाख के वीर नागरिकों की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया है और भारतीय सेना के साथ हमेशा खड़े रहे हैं।”



