उत्तर प्रदेश
कानपुर में दहेज की भेंट चढ़ी माधुरी: ससुराल वालों ने पीट-पीटकर मार डाला, 3 साल की बेटी बनी गवाह

कानपुर, 27 सितंबर 2025 : उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जो समाज के काले सच को नंगा कर देती है। दहेज की लालच में एक निर्दोष युवती को उसके ससुराल वालों ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। माखी के सराय मोहल्ले की रहने वाली माधुरी की शादी को चार साल होने वाले थे, लेकिन ससुराल पक्ष को दिए गए दहेज से संतुष्टि न मिलने पर वे लगातार उसे प्रताड़ित करते रहे। आखिरकार, 22 सितंबर को सारी हदें पार करते हुए उन्होंने माधुरी को बुरी तरह पीटा, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। 26 सितंबर को लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
यह घटना कलक्टरगंज थाना क्षेत्र के धनकुटी इलाके से जुड़ी है, जहां माधुरी का ससुराल 74/32 धनकुटी में स्थित है। माधुरी के पिता ने बताया कि बेटी की शादी 14 मई 2021 को कुलदीप राठौर (पिता: गोपी राठौर) से सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। दहेज में उन्होंने 3 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के जेवर और अन्य घरेलू सामान दिया था। लेकिन ससुराल पक्ष को यह ‘कम’ लगा। खासतौर पर सोने की जंजीर और एक मोटरसाइकिल की मांग पूरी न होने पर वे माधुरी को रोजाना ताने मारते और मारपीट करते। “हमने जो दिया, वो हमारी हैसियत के अनुसार था। लेकिन वे कभी संतुष्ट न हुए। बेटी अक्सर फोन पर रो-रोकर बताती कि ससुराल वाले उसे ‘दहेज की भूखी’ कहकर अपमानित करते हैं,” माधुरी के भाई ने आंसू भरी आंखों से बताया।
घटना की शुरुआत 22 सितंबर को हुई, जब ससुराल वालों ने माधुरी पर सारी हदें पार कर दीं। सूत्रों के अनुसार, दहेज की पुरानी दुश्मनी फिर भड़क उठी। कुलदीप और उसके परिवार ने मिलकर माधुरी को लाठियों और मुक्कों से पीटा। चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी भी डर गए, लेकिन कोई हस्तक्षेप न कर सका। अगले दिन, 22 सितंबर को कुलदीप ने माधुरी के मायके वालों को फोन किया और बताया कि “तुम्हारी बेटी नॉर्थ स्टार अस्पताल में भर्ती है।” मायके वाले घबरा गए और तुरंत कानपुर के नॉर्थ स्टार अस्पताल पहुंचे। वहां माधुरी की हालत बेहद नाजुक थी—चेहरे पर चोटें, शरीर पर जख्म और सांस लेने में तकलीफ। डॉक्टरों ने तत्काल लखनऊ के प्रसिद्ध बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया।
लखनऊ पहुंचने पर माधुरी को आईसीयू में भर्ती किया गया, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। 26 सितंबर को माधुरी ने अंतिम सांसें लीं, लेकिन उसके ससुराल वाले कहीं नजर नहीं आए। माधुरी के पिता ने कहा, “बेटी ने हमें बताया था कि कुलदीप और सास-ससुर उसे रोज मारते हैं। हमने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। अब बेटी चली गई, और अपराधी आजाद घूम रहे हैं।”
दाहसंस्कार की तस्वीरें भी दिल दहला देने वाली हैं। माधुरी का शव कानपुर नगर निगम के भगवतदास घाट पर लाया गया, लेकिन अंतिम संस्कार में न तो उसका पति कुलदीप मौजूद था, न ही कोई ससुराल वाला। सिर्फ मायके वाले और कुछ दूर के रिश्तेदार ही थे। दाहसंस्कार के दौरान मायके वालों का रो-रोकर बुरा हाल था। माधुरी की मां बेहोश हो गईं, और पिता बार-बार कहते रहे, “हमने बेटी को ससुराल सौंपा था, लेकिन उन्होंने उसे काल का ग्रास बना दिया।”
सबसे मार्मिक पहलू यह है कि माधुरी की 3 साल की मासूम बेटी इस हत्याकांड की चश्मदीद गवाह बनी। छोटी बच्ची ने पुलिस को बयान दिया कि “मम्मी को सब लोग लड़ा लड़ा मार डाला । कलक्टरगंज के एसएचओ ने बताया कि बच्ची को मायके भेज दिया गया है, और उसके बयान को मजिस्ट्रेट के समक्ष रिकॉर्ड कराया जाएगा। “बच्ची का बयान मामले को मजबूत करेगा।
लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। मायके वाले पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगा रहे हैं। माधुरी के भाई ने कहा, “पुलिस सिर्फ कागजों पर एक्शन ले रही है। आरोपी फरार हैं, लेकिन लुकआउट नोटिस क्यों नहीं जारी हुआ? क्या दहेज हत्याओं को इतना हल्का लिया जाएगा?”
यह घटना कानपुर में दहेज हत्याओं की बढ़ती संख्या को उजागर करती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, 2023 में उत्तर प्रदेश में 1,200 से अधिक दहेज मौतें दर्ज हुईं, और 2025 की पहली नौ महीनों में यह संख्या 900 को पार कर चुकी है। कानपुर जैसे औद्योगिक शहर में यह समस्या और गंभीर है। हाल ही में सितंबर 2025 में ही कर्नलगंज में एक अन्य दहेज मामले में ससुराल वालों ने बहू को कमरे में बंद कर जहरीला सांप छोड़ दिया था, जिसकी शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ हत्या का प्रयास का केस दर्ज हुआ। मुरादाबाद में भी 21 सितंबर को एक नवविवाहिता की दहेज हत्या हो चुकी है, जहां पति को गिरफ्तार किया गया। ये मामले बताते हैं कि दहेज निषेध अधिनियम 1961 और घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के बावजूद, सामाजिक जागरूकता की कमी से महिलाएं असुरक्षित हैं।
वकीलों का कहना है कि ऐसे मामलों में तेज जांच जरूरी है। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर दयाल ने बताया, “दहेज हत्याओं में 70 प्रतिशत मामलों में सजा नहीं मिलती, क्योंकि सबूत कमजोर होते हैं। लेकिन यहां बच्ची का बयान और मेडिकल रिपोर्ट मजबूत हैं। पुलिस को 7 दिनों में आरोपी गिरफ्तार करने चाहिए।
माधुरी की कहानी समाज को आईना दिखाती है। एक तरफ जहां महिलाएं शिक्षा और सशक्तिकरण की बातें कर रही हैं, वहीं दहेज जैसी कुप्रथा अभी भी जड़ें जमा रही है। माधुरी के मायके वाले कहा न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा, “बेटी की मौत व्यर्थ नहीं जाएगी। हम सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे।”
यह घटना न सिर्फ एक परिवार का दर्द है, बल्कि पूरे समाज का सवाल है। क्या हम दहेज लोभी मानसिकता से कभी उबर पाएंगे? माधुरी की आत्मा को शांति मिले, और उसकी बेटी सुरक्षित रहे—यही प्रार्थना है।
संदीप कुमार चीफ ब्यूरो ,जन संकल्प न्यूज


