गरीबी की चोट पर रिश्वत की मार, विधवा कुशमा ने डीएम को सुनाई पंचायत मित्र की करतूत
पंचायत मित्र बुद्धिलाल ने मकान निर्माण और शौचालय बनवाने के लिए 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी है। "पहले पैसा दो, फिर काम होगा,"

उन्नाव, 18 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के तालिब नगर में भ्रष्टाचार की एक और काली तस्वीर उजागर हुई है। यहा मजरा बौनामाऊ की विधवा महिला कुशमा, जो चरम रोग से जूझ रही हैं और अकेले पांच बेटियों को पाल रही हैं, ने सरकारी योजनाओं के नाम पर रिश्वतखोरी का खुलासा किया। कुशमा की दो बेटियां नेत्रज्योति से वंचित हैं—एक पूरी तरह से नेत्रहीन लड़की और दूसरी को बहुत कम दिखाई देता है। पति के स्वर्गवास के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर है, लेकिन सरकारी सहायता अब रिश्वत के बंधन में जकड़ी नजर आ रही है।
कल सुबह कुशमा डीएम कार्यालय पहुंचीं। उनके हाथ में एक प्रार्थना पत्र था, आंखों में आंसू और दिल में गुस्से की आग। उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि पंचायत मित्र बुद्धिलाल ने मकान निर्माण और शौचालय बनवाने के लिए 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी है। “पहले पैसा दो, फिर काम होगा,” बुद्धिलाल ने धमकी दी। कुशमा ने गुस्से में कहा, “गरीब की जेब से क्या नोच लिया जा रहा है? योजनाओं का नाम लेकर लूट मचा रखी है।” उनका घर बदहाली का शिकार है, जहां कागजों पर सरकारी मदद तो है, लेकिन हकीकत में सिर्फ पैसों की मांग।
कुशमा ने डीएम को विस्तार से सुनाया कि बुद्धिलाल ने न सिर्फ रिश्वत मांगी, बल्कि अभद्रता भी की। उन्होंने पत्रकारों का जिक्र करते हुए कहा, “इनसे शिकायत कर लो, ये आपको खाने को नहीं देंगे। मेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।” कुशमा का आरोप है कि पंचायत मित्र ने उनका हक छीन लिया है। तालिब नगर जैसे इलाकों में भ्रष्टाचार का बोलबाला हो गया है। लोग डर के मारे चुप हैं, लेकिन कुशमा जैसी बहादुर महिलाएं आवाज उठा रही हैं।
डीएम ने प्रार्थना पत्र सुनते ही गंभीरता दिखाई। उन्होंने पंचायत मित्र पर सीधी उंगली उठाई और मामले की जांच के आदेश दिए। अगर आरोप सही पाए गए, तो बुद्धिलाल पर निलंबन, विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें जेल की सजा भी शामिल है। जिला प्रशासन ने कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
प्रस्तुत हैं कुछ काव्य पंक्तियाँ –
गरीबी की चादर ओढ़े विधवा की आहें,
पांच फूलों को सींचे, दो अंधेरे में खोए।
योजना का नाम लेकर लुटेरे नोचें जेबें,
पंचायत मित्र बने भेड़िये, हक पर कब्जा जोए।
आंसुओं से लथपथ पहुंची डीएम के दर,
पंद्रह हजार की मांग, धमकी का बवंडर।
“पत्रकार खिला न पाएंगे,” बोला वो दुष्ट,
लेकिन हिम्मत ने तोड़ा चुप्पी का तारा-उजाला।
तालिब नगर में भ्रष्टाचार का काला बादल,
लोग डरें चुप रहें, आवाज कुशमा की गूंजे।
डीएम उठो, उंगली दो इस काले कारोबार पर,
न्याय की किरण बने, जेल हो सजा का इंतजार।
गरीबी की मार सहो, रिश्वत न सहना कभी,
हक की लड़ाई में कुशमा बनी मशाल सुलगती।
उन्नाव जागे, योजनाएं हों सच्ची राहें,
भ्रष्ट के कदम रुकें, न्याय की बजे घंटियां।
यह घटना प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर सवाल खड़े करती है। गरीबी की मार झेल रही विधवाओं के साथ ऐसा अन्याय कब तक? कुशमा की हिम्मत सराहनीय है। डीएम साहब, अब कार्रवाई कब? तालिब नगर के निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि न्याय मिले और भ्रष्टाचार का यह अड्डा साफ हो।
संवाददाता – हितेश कुमार की रिपोर्ट


