Mathura Flood: मथुरा में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, बाढ़ की चपेट में आए 45 गांव

Mathura Flood: यमुना में रविवार को बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई। शाम 5 बजे तक यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 166 मीटर से बढ़कर 167.55 मीटर हो गया। जिले की स्थिति बिगड़ गई और यमुना का पानी बैंक बिहारी मंदिर मार्ग तक पहुंच गया। इस बाढ़ से शहर और ग्रामीण क्षेत्र दोनों प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने हवाई और जमीनी निगरानी बढ़ा दी है और राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं।
प्रभावित इलाकों की स्थिति और कृषि पर असर
मथुरा शहर में विश्राम घाट रोड बंद कर दी गई। जिले के चार तहसीलों के 45 गांव बाढ़ की चपेट में आए हैं। 20 गांवों की कृषि प्रभावित हुई है और 25 गांवों की आबादी सीधे बाढ़ से प्रभावित हुई है। कई कॉलोनियों में पानी भर गया है और बाढ़ के कारण सड़कें बह चुकी हैं। गोविंद की गली और रमनरेती इलाके में चार फीट पानी भर गया। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी रखा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

राहत कार्य और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोग
जिले में अब तक लगभग 9,000 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने 21 गांवों से 4,205 लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में भेजा है। साथ ही 600 जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और 1,250 राशन किट वितरित की गई हैं। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए विशेष टीमें बनाई हैं जो राहत कार्य और सामग्री वितरण में लगी हुई हैं।
अधिकारियों ने किया क्षेत्र का निरीक्षण
रविवार को DM सीपी सिंह और SSP श्लोक कुमार ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने गए। उन्होंने लक्ष्मी नगर, यमुनापार और तिवारीपुरम के विशाल मैरिज हॉल में बनाए गए राहत शिविरों का दौरा किया। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लिया और उन्हें आश्वासन दिया कि नुकसान का मुआवजा सर्वे के बाद दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने पशुओं के लिए चारे और पानी की व्यवस्था का निरीक्षण भी किया।
प्रशासन की अपील और भविष्य की योजना
DM सीपी सिंह ने बाढ़ प्रभावितों से कहा कि वे तत्काल बाढ़ शेल्टर में जाएं और यमुना के पास न रहें। उन्होंने आश्वस्त किया कि एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी। प्रशासन ने सभी प्रभावित इलाकों में राहत कार्य को तेज किया है और लोगों से सहयोग करने की अपील की है। इसके अलावा चारे और पानी की व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रबंध किए गए हैं ताकि जानवरों को भी सुरक्षित रखा जा सके।


